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जजों की नियुक्ति पर विवाद: कॉलेजियम भेज रहा है कम नाम- एजी; कोर्ट ने कहा- सरकार सिफारिशें दबाकर बैठी

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[ad_1] . जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर सरकार और न्यायपालिका के बीच जारी विवाद शुक्रवार को काफी तल्ख हो गया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (एजी) ने केंद्र की ओर से कॉलेजियम को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के खाली पद भरने के लिए बहुत कम नामों की सिफारिश की जा रही है। आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें [ad_2] Source link

‘यूएस-पेसिफिक कमांड’ का नाम ‘इंडो-पेसिफिक कमांड’ करने का अमेरिकी संसद में प्रस्ताव

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[ad_1] US Parliament एनडीएए 2019 के तहत उक्त बातें इसकी महत्वपूर्ण प्रस्ताव का हिस्सा हैं और समिति से इनको मंजूरी मिलने के बाद इसके लिए 639.1 अरब डॉलर का अनुदान मंजूर हो जाएगा. फोटोः ट्विटर-@PacificCommand [ad_2] Source link

जिस जनरल थिमैया का नाम लेकर PM मोदी ने पंडित नेहरू पर साधा निशाना, पढ़े उनकी Story

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[ad_1] पीएम नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के कलबुर्गी में तीन मई को अपनी चुनावी रैली में कांग्रेस पर हमलावर रुख अपनाते हुए कहा कि यह धरती वीरों की भूमि है लेकिन कांग्रेस सेना के बहादुर जवानों के त्‍याग का सम्‍मान नहीं करती. जब हमारे जवानों ने सर्जिकल स्‍ट्राइक किया तो कांग्रेस ने उस पर सवाल उठाए. वे मुझसे सर्जिकल स्‍ट्राइक का सबूत मांगते रहे. सर्जिकल स्‍ट्राइक के बाद कांग्रेस के एक वरिष्‍ठ नेता ने हमारे मौजूदा आर्मी चीफ को 'गुंडा' कहा . इतिहास गवाह है कि इस धरती के वीर फील्‍ड मार्शल करियप्‍पा और जनरल थिमैया के साथ कांग्रेस सरकार ने कैसा बर्ताव किया? जनरल थिमैया को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और रक्षा मंत्री कृष्‍णा मेनन ने अपमानित किया. इस संदर्भ में इतिहास के पन्‍नों को उलटकर जनरल थिमैया की कहानी पर आइए डालते हैं एक नजर: जनरल कोडनडेरा सुब्‍बैया थिमैया 1906 में कर्नाटक में जन्‍मे थिमैया उसी कोडनडेरा समुदाय से ताल्‍लुक रखते थे जिससे देश के पहले कमांडर-इन-चीफ जनरल करियप्‍पा संबंधित थे. जनरल केएस थिमैया 1957-61 तक आर्मी चीफ रहे. द्वितीय विश्‍व युद्ध के दौरान इंफ्रेंट्री ब्रिगेड ...

जस्टिस जोसेफ मामले में सरकार की सफाई, नाम वापसी का उत्तराखंड फैसले से कोई संबंध नहीं

[ad_1] नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ की पदोन्नति की सिफारिश थी, लेकिन केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की इस सिफारिश को ठुकरा दिया था. इस पर सरकार ने सफाई दी है कि सिफारिश ठुकराने के पीछे उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का मामला कतई नहीं है. सरकार ने बुधवार को इस बात को खारिज कर दिया कि उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की सुप्रीम में नियुक्ति के प्रस्ताव को उसने इसलिए ठुकरा दिया कि उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को पलट दिया था. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के तीन फैसलों से सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकती है. प्रसाद ने कहा कि वह पूरे अधिकार के साथ इस बात से इनकार करते हैं कि इसका उससे कोई लेना-देना है. उन्होंने कहा कि अपने रूख का समर्थन करने के लिए उनके पास दो स्पष्ट कारण हैं. यह भी पढ़ें-  जस्टिस जोसेफ की पदोन्नति पर फैसला टला, कॉलेजियम की बैठक रही बेनतीजा कानून मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में तीनचौथाई बहुमत के ...